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NPS निकासी नियम

 एनपीएस निकासी नियम, प्रवेश आयु में ढील। विवरण यहाँ 

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पेशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने सब्सक्राइबर्स को बिना एन्युइटी खरीदे पूरी संचित पेंशन राशि निकालने की अनुमति दी है, अगर पेंशन कॉर्पस 5 लाख रुपये से कम है। वर्तमान में, सेवानिवृत्ति के समय या 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के समय ₹2 लाख से अधिक की राशि वाले एनपीएस ग्राहकों को अनिवार्य आधार पर बीमा कंपनियों द्वारा दी जाने वाली वार्षिकी खरीदने की आवश्यकता होती है।


 वे शेष 60 प्रतिशत एकमुश्त राशि के रूप में निकाल सकते हैं। एक गजट अधिसूचना में, पेंशन नियामक ने यह भी कहा कि एनपीएस के लिए एकमुश्त आधार पर समय से पहले निकासी की सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹2.5 लाख कर दी गई है। "... जहां ग्राहक के स्थायी सेवानिवृत्ति खाते में संचित पेंशन राशि ₹ 5 लाख की राशि के बराबर या उससे कम है, या प्राधिकरण द्वारा निर्दिष्ट सीमा के अनुसार, ग्राहक के पास संपूर्ण संचित राशि को वापस लेने का विकल्प होगा। वार्षिकी खरीदे बिना पेंशन संपत्ति और इस विकल्प के इस तरह के प्रयोग पर, ऐसे ग्राहक का अधिकार…

नियामक ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में प्रवेश की अधिकतम आयु 65 से बढ़ाकर 70 कर दी है। निकास आयु सीमा को भी 75 वर्ष तक बढ़ा दिया गया है।

राष्‍ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) एक पेंशन सह निवेश योजना है जिसे भारत सरकार द्वारा भारत के नागरिकों को वृ‍द्धावस्‍था सुरक्षा प्रदान करने के लिए शुरू किया गया है। यह योजना सुरक्षित और विनियमित बाजार आधारित रिर्टन के जरिए प्रभावशाली रूप से आपकी सेवानिवृत्ति की योजना बनाने हेतु एक आकर्षक दीर्घकालिक बचत मार्ग से प्रारंभ होती है। इस योजना का विनियमन पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा किया जाता है। पीएफआरडीए द्वारा स्‍थापित राष्‍ट्रीय पेंशन प्रणाली न्‍यास (NPS Trust) एनपीएस के अंतर्गत सभी आस्तियों का पंजीकृत मालिक है।

एनपीएस को व्‍यापक रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है और इसके अतिरिक्‍त इसे निम्‍नलिखित विभिन्‍न सेक्‍टरों में विभक्‍त किया जा सकता है :


1. सरकारी सेक्‍टर


केन्द्र सरकार:

केन्‍द्र सरकार ने 1 जनवरी, 2004 से (सशस्‍त्र बलों को छोड़कर) राष्‍ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) की शुरूआत की थी। केन्‍द्रीय स्‍वायत्‍त निकायों के सभी कर्मचारी जिनकी नियुक्ति उपरोक्‍त तिथि या उसके बाद हुई हो, एनपीएस के सरकारी सेक्‍टर के तहत अनिवार्य रूप से कवर हैं। केन्‍द्र सरकार/ कैब के कर्मचारी पेंशन हेतु मासिक वेतन में से अंशदान करते हैं और नियोक्‍ता द्वारा समान अंशदान किया जाता है।

राज्या सरकार:

केन्‍द्र सरकार के बाद, विभिन्‍न राज्‍य सरकारों ने इस अवसंरचना को अपनाया है और विभिन्‍न तिथियों से एनपीएस के कार्यान्‍वयन को प्रभावी किया है। यदि संबंधित राज्‍य सरकार/केन्‍द्र शासित प्रदेश ने एनपीएस अवसंरचना को अपना लिया है और इसका कार्यान्‍वयन आंरभ कर दिया है तो राज्‍य स्‍वायत्‍त निकाय (एसएबी) भी एनपीएस को अपना सकते हैं। राज्‍य सरकार/एसएबी कर्मचारी भी पेंशन हेतु नियोक्‍ता के समान अंशदान के साथ मासिक वेतन में अंशदान करते हैं।

2. निजी सेक्टसर (गैर-सरकारी सेक्टरर) :


कॉरपोरेट:

एनपीएस कॉरपोरेट सेक्‍टर मॉडल विभिन्‍न संगठनोंको उनके नियोक्‍ता-कर्मचारी संबंधोंकी परिधिके भीतर एक संगठित संस्‍थाके रूपमें अपने कर्मचारियों के लिए एनपीएसको अपनाने हेतु उपयुक्‍त बनाने के लिए एनपीएस का एक अनुकूलित संस्‍करण है

ऑल सिटिजन ऑफ इंडिया:

ऐसा कोईभी व्‍यक्तिजो उपरोक्‍त किसीभी सेक्‍टरके अंतर्गत कवर नहीं है 1 मई, 2009 से ऑल सिटिजन ऑफ इंडिया सेक्‍टरके अंतर्गत एनपीएस अवसंरचनामें शामिल हो सकता है।

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